केदारनाथ से कैंची धाम तक रोपवे की तैयारी, उत्तराखंड में 51 परियोजनाओं का प्लान; जानिए कहां-कहां बनेगा नेटवर्क

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Kainchi-Dham-Bypass-Update

Uttarakhand Ropeway | CM Dhami | Ropeway Projects : उत्तराखंड में रोपवे कनेक्टिविटी को बढ़ाने की तैयारी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर प्रदेश में करीब 160 किलोमीटर लंबाई की 51 रोपवे परियोजनाएं प्रस्तावित की गई हैं। इन परियोजनाओं का मकसद धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान करने के साथ पहाड़ी क्षेत्रों में परिवहन के विकल्प को मजबूत करना है।

इन प्रस्तावित परियोजनाओं में सोनप्रयाग-केदारनाथ, गोविंदघाट-हेमकुंड साहिब, रानीबाग-हनुमानगढ़ी-कैंची धाम, कनकचौरी-कार्तिक स्वामी, जोशीमठ-औली-गोरसों और रैथल-दयारा बुग्याल जैसी प्रमुख परियोजनाएं शामिल हैं।

केदारनाथ रोपवे परियोजना को केंद्र सरकार पहले ही मंजूरी दे चुकी है। 12.9 किलोमीटर लंबे सोनप्रयाग-केदारनाथ रोपवे की लागत करीब 4,081 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। सरकार के मुताबिक इसके बनने से केदारनाथ की यात्रा का समय काफी कम हो सकेगा।

वहीं कैंची धाम को भी रोपवे नेटवर्क से जोड़ने की तैयारी चल रही है। हाल में काठगोदाम-हनुमानगढ़ी रोपवे को कैंची धाम तक जोड़ने को लेकर उच्चस्तरीय बैठक हुई थी। इससे नैनीताल और कैंची धाम क्षेत्र में बढ़ते यातायात दबाव को कम करने की दिशा में काम आगे बढ़ाने की बात कही गई है।

मसूरी में पुरुकुल से लाइब्रेरी तक करीब 5.2 किलोमीटर लंबे रोपवे का काम भी प्रगति पर है। इसके अलावा प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में पर्यटन और धार्मिक स्थलों को जोड़ने वाली कई अन्य परियोजनाओं पर भी योजना और व्यवहार्यता से जुड़े काम किए जा रहे हैं। उत्तराखंड मेट्रो रेल, अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर एंड बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन ने भी अलग-अलग रोपवे परियोजनाओं के लिए तकनीकी और भू-तकनीकी अध्ययन से जुड़े टेंडर जारी किए हैं।

सरकार का कहना है कि उत्तराखंड की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में रोपवे परिवहन का एक उपयोगी विकल्प बन सकता है। इससे धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होने, सड़कों पर वाहनों का दबाव घटने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अनुसार रोपवे कनेक्टिविटी से पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिल सकती है। सरकार की ओर से प्रस्तावित परियोजनाओं को अलग-अलग एजेंसियों के माध्यम से आगे बढ़ाया जा रहा है।

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