महान स्वतंत्रता सेनानी, प्रख्यात कवयित्री और “भारत कोकिला” के नाम से विख्यात सरोजिनी नायडू जी की जयंती पर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि सरोजिनी जी का जीवन केवल इतिहास का अध्याय नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए मार्गदर्शक प्रकाश है।
उन्होंने अपने संदेश में कहा कि सरोजिनी नायडू जी ने स्वतंत्रता आंदोलन में जिस निर्भीकता और ओजस्विता के साथ अपनी भूमिका निभाई, वह भारतीय नारी शक्ति का अद्भुत उदाहरण है। उनकी वाणी में जहां काव्य की कोमलता थी, वहीं राष्ट्रप्रेम की ज्वाला भी प्रखर रूप से प्रज्ज्वलित थी। यही कारण है कि उन्हें “भारत कोकिला” की उपाधि मिली।
हरीश रावत ने कहा कि सरोजिनी जी केवल एक कवयित्री नहीं थीं, बल्कि वह जनआंदोलनों की सशक्त आवाज थीं। उन्होंने महिलाओं को सार्वजनिक जीवन में आगे आने का साहस दिया और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए निरंतर संघर्ष किया। आज जब समाज विभिन्न चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब उनके विचार हमें संयम, संवेदना और संघर्ष—तीनों का संतुलन सिखाते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि उत्तराखंड की धरती, जो त्याग और तपस्या की भूमि रही है, सरोजिनी नायडू जैसी विभूतियों से प्रेरणा लेकर ही आगे बढ़ सकती है। शिक्षा, समानता और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में निरंतर प्रयास ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
अपने संदेश के अंत में हरीश रावत ने युवाओं से आह्वान किया कि वे सरोजिनी नायडू जी के साहित्य और विचारों को पढ़ें, समझें और अपने जीवन में उतारें। राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता ही उनके सपनों के भारत की दिशा में वास्तविक कदम होगा।
हरीश रावत का संदेश: “भारत कोकिला” सरोजिनी नायडू की जयंती पर भावपूर्ण नमन







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