महंगाई के बाद अब बिजली बिल से जनता पर अंतिम प्रहार
उत्तराखंड में बिजली एक बार फिर महंगी कर दी गई है और इसका सीधा बोझ आम जनता पर डाला गया है। यूपीसीएल ने फरवरी माह के लिए एफपीपीसीए के नाम पर चार पैसे से 15 पैसे प्रति यूनिट तक की बढ़ोतरी कर दी है, जिसका असर होली के आसपास आने वाले बिजली बिलों में साफ़ दिखाई देगा। इस फैसले पर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भाजपा सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा—
“उत्तराखंड में बिजली और महंगी हो जाएगी। शायद लोगों के शरीर पर कुछ खाल बची है, सरकार उसे भी उतारने में तुल गई है।”
हरीश रावत ने कहा कि भाजपा सरकार ने मासिक समायोजन का झूठा भरोसा देकर जनता को गुमराह किया। दावा किया गया था कि हर महीने समायोजन होने से सालाना दरें नहीं बढ़ेंगी, लेकिन हकीकत यह है कि जनवरी 2025 से जनवरी 2026 के बीच दस महीनों में बिजली महंगी की गई और ऊपर से अप्रैल 2025 से 5.6 प्रतिशत वार्षिक बढ़ोतरी भी लागू कर दी गई। यानी एक ही उपभोक्ता से दो बार वसूली की जा रही है।
उन्होंने कहा कि घरेलू उपभोक्ता, व्यापारी, किसान, उद्योग, बीपीएल परिवार—कोई भी इस बढ़ोतरी से अछूता नहीं है। यह साबित करता है कि भाजपा सरकार को न गरीब की चिंता है, न मध्यम वर्ग की और न ही प्रदेश की अर्थव्यवस्था की।
हरीश रावत के अनुसार, भाजपा का तथाकथित विकास अब बिजली बिलों में दिखाई दे रहा है। जनता पहले ही महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रही है, ऐसे में बिजली दरों में लगातार बढ़ोतरी सरकार की जनविरोधी सोच को उजागर करती है। उत्तराखंड की जनता अब समझ चुकी है कि यह सिर्फ बिजली नहीं, बल्कि भाजपा की नीतियों की महंगाई है।















Leave a Reply