हरीश रावत ने ‘इंडिया एआई इंपैक्ट समिट 2026’ को लेकर मुख्यमंत्री के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर असहमति जताना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन इसे देश की छवि धूमिल करने से जोड़ना गलत और भ्रामक है।
पत्रकारों से विशेष बातचीत में हरिश रावत ने आरोप लगाया कि भाजपा पूरे देश में एक जैसा बयान दिलवाकर यह नैरेटिव गढ़ने की कोशिश कर रही है कि विपक्ष की हर आलोचना राष्ट्रविरोध है। उन्होंने कहा कि यह सच नहीं है। लोकतंत्र में सवाल पूछना और नीतियों पर असहमति दर्ज कराना देशद्रोह नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकार है।
हरीश रावत ने उदाहरण देते हुए कहा कि पहले भी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, खेल आयोजन और बड़े वैश्विक कार्यक्रम भारत में होते रहे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि जब कॉमनवेल्थ गेम्स आयोजित हुए थे, तब भाजपा विपक्ष में रहते हुए खुलकर विरोध कर रही थी। उस समय भी कई आरोप लगाए गए और कार्यक्रमों पर सवाल उठाए गए।
उनका कहना है कि आज जब भाजपा सत्ता में है, तो विपक्ष की आलोचना को राष्ट्रविरोध करार दिया जा रहा है, जबकि यही काम भाजपा ने विपक्ष में रहते हुए कई बार किया। हरीश रावत ने तंज कसते हुए कहा कि “अपने गिरेबान में झांकने के बजाय भाजपा दूसरों पर उंगली उठा रही है।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘इंडिया एआई इंपैक्ट समिट 2026’ जैसे कार्यक्रम देश के लिए महत्वपूर्ण हैं, लेकिन किसी भी नीति, खर्च या आयोजन की पारदर्शिता पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। सरकार को चाहिए कि वह आलोचना को सकारात्मक रूप से ले, न कि उसे राष्ट्रद्रोह की संज्ञा दे।
हरिश रावत का कहना है कि देश की छवि केवल विरोध से नहीं, बल्कि संवाद की कमी और असहमति को दबाने की प्रवृत्ति से प्रभावित होती है। उन्होंने भाजपा पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि लोकतंत्र में सत्ता और विपक्ष दोनों की जिम्मेदारी है कि वे संवाद की परंपरा को मजबूत करें, न कि उसे कमजोर।
हरीश रावत का बड़ा बयान: “AI समिट पर सवाल उठाना देशहित में, न कि राष्ट्रविरोध















Leave a Reply