देवभूमि उत्तराखंड की आस्था, अर्थव्यवस्था और पहचान की धुरी मानी जाने वाली चार धाम यात्रा एक बार फिर व्यवस्थागत सवालों के घेरे में है। पूर्व मुख्यमंत्री हरिश रावत ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि पिछले तीन-चार वर्षों से एक चिंताजनक प्रवृत्ति देखी जा रही है—सड़क मरम्मत और निर्माण कार्य ठीक उस समय शुरू किए जाते हैं जब यात्रा आरंभ होने वाली होती है।
हरिश रावत का सवाल सीधा है—जिन कार्यों को यात्रा समाप्त होते ही शुरू कर देना चाहिए था, उन्हें यात्रा शुरू होने से ठीक पहले क्यों शुरू किया जाता है? क्या यह ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने की रणनीति है? क्या यह विभागीय भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का तरीका है? या फिर यह महज़ लापरवाही और दूरदर्शिता की कमी है? उनका कहना है कि इस तरह के फैसलों का सीधा असर यात्रा की सुचारु व्यवस्था पर पड़ता है। सड़कों पर अधूरा काम, जगह-जगह जाम, धूल और जोखिम—ये सब न केवल श्रद्धालुओं की परेशानी बढ़ाते हैं बल्कि राज्य की छवि को भी प्रभावित करते हैं।
चारधाम यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि लाखों लोगों की भावनाओं से जुड़ा महाअभियान है। हर साल देश-विदेश से श्रद्धालु उत्तराखंड पहुंचते हैं। ऐसे में यदि यात्रा मार्गों पर निर्माण कार्य अंतिम समय में शुरू किए जाते हैं, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या सरकार ने समयबद्ध योजना बनाई थी?
हरिश रावत ने स्पष्ट कहा कि “देवभूमि की गरिमा और यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि है—लापरवाही नहीं, दूरदर्शिता चाहिए।” उनके अनुसार सरकार को चाहिए कि यात्रा से महीनों पहले सभी जरूरी कार्य पूरे कर लिए जाएं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की असुविधा या खतरे का सामना न करना पड़े।
पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी मांग उठाई कि यदि कामों में देरी या समय निर्धारण में गड़बड़ी हुई है, तो उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। जनता यह जानना चाहती है कि निर्णय लेने में किस स्तर पर चूक हुई और क्यों।
चारधाम यात्रा राज्य की अर्थव्यवस्था का भी बड़ा आधार है। ऐसे में यदि अव्यवस्था का माहौल बनता है, तो इसका असर स्थानीय व्यापारियों, होटल व्यवसायियों और परिवहन से जुड़े हजारों परिवारों पर भी पड़ता है।
देवभूमि की पहचान उसकी व्यवस्थागत क्षमता और श्रद्धालुओं के विश्वास से जुड़ी है। ऐसे में सवाल केवल सड़कों के समय पर निर्माण का नहीं, बल्कि शासन की प्राथमिकताओं और पारदर्शिता का भी है। अब देखना यह है कि सरकार इन आरोपों पर क्या जवाब देती है और क्या आने वाले समय में यात्रा से पहले सभी तैयारियां समय पर पूरी होंगी।
हरिश रावत का बड़ा आरोप: चारधाम यात्रा से ठीक पहले सड़क कार्य क्यों? किसे फायदा पहुंचाया जा रहा है?















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