देवभूमि उत्तराखंड की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भाजपा सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि बीते कुछ वर्षों की घटनाओं ने राज्य की छवि को आघात पहुंचाया है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर क्यों देवभूमि, जो सदियों से सर्वकल्याण और सहअस्तित्व की प्रतीक रही है, उसे नफरत की भूमि में बदलने की कोशिश की जा रही है?
हरिश रावत ने कहा कि सत्ता में बैठी भाजपा के पास न तो विकास का स्पष्ट एजेंडा है, न ही जनकल्याण की ठोस सोच। उनके अनुसार, जब सरकार के पास उपलब्धियों का लेखा-जोखा नहीं होता, तब वह असल मुद्दों से ध्यान भटकाने की राजनीति करती है। बेरोजगारी, महंगाई, पलायन और बदहाल व्यवस्थाओं जैसे सवाल आज भी जनता के सामने खड़े हैं, लेकिन सरकार इनके समाधान की बजाय प्रचार में व्यस्त है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य के भीतर भ्रष्टाचार को सुशासन का नाम देकर पेश किया जा रहा है। जबकि हकीकत यह है कि आम जनता को राहत नहीं मिल रही। रावत का कहना है कि उत्तराखंड की आत्मा सर्वकल्याणकारी रही है — यहां की संस्कृति, यहां के देवी-देवता और सनातन परंपरा सबको साथ लेकर चलने की प्रेरणा देते हैं। ऐसे में विभाजन और टकराव की राजनीति देवभूमि के मूल स्वभाव के खिलाफ है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उत्तराखंड की पहचान भाईचारे, सौहार्द और सर्वहित की भावना से है। इस पहचान को कमजोर करने की कोई भी कोशिश सफल नहीं होगी। उन्होंने जनता से आह्वान किया कि वे सच को पहचानें और विकास, पारदर्शिता व जनकल्याण के मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगें।
हरिश रावत का संदेश साफ है — देवभूमि की असली ताकत उसकी एकता और सर्वकल्याण की भावना है। जनता सब देख रही है और आने वाले समय में बदलाव की बयार तय है।
हरीश रावत का बड़ा हमला: “देवभूमि को नफरत की भूमि नहीं बनने देंगे, भाजपा के पास विकास का कोई एजेंडा नहीं















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