देहरादून के गांधी पार्क में कल उस समय जनभावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा, जब भूमिहीनों, आपदा पीड़ितों और वर्षों से भूमि अधिकार की प्रतीक्षा कर रहे परिवारों के समर्थन में इंडिया गठबंधन उत्तराखंड ने जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। इस आंदोलन में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की सक्रिय भागीदारी ने इसे और अधिक राजनीतिक व सामाजिक वजन दिया।
धरने के समापन पर सिटी मजिस्ट्रेट, देहरादून को माननीय मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया। राज्य सरकार को 30 अप्रैल तक समाधान का समय देते हुए चेतावनी दी गई कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो 1 मई, मजदूर दिवस से आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
हरीश रावत ने अपने संबोधन में कहा कि 26 दिसंबर 2016 के मंत्रिमंडल निर्णय के अनुरूप भूमिधरी अधिकार पात्र लाभार्थियों को दिए जाने चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस मुद्दे पर जनता को भ्रमित कर रही है और जानबूझकर फैसले को लागू नहीं कर रही।
धरने में बिंदुखत्ता, बापूग्राम, पुछड़ी, बागजाला, बग्गा चौव्वन समेत विभिन्न क्षेत्रों को राजस्व ग्राम का दर्जा देने और पात्र लोगों को मालिकाना हक देने की मांग दोहराई गई। साथ ही टिहरी डैम और वन विस्थापितों, अनुसूचित जाति-जनजाति समुदायों तथा पीढ़ियों से बसे ग्रामीणों को भूमि अधिकार देने पर जोर दिया गया। मलिन बस्तियों के निवासियों को 2016 के कानून के तहत मालिकाना हक देने और सीलिंग भूमि से लैंड बैंक बनाकर आपदा प्रभावितों को बसाने की मांग भी प्रमुखता से उठी।
धरने में कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के नेताओं, कार्यकर्ताओं और सैकड़ों स्थानीय लोगों की मौजूदगी ने साफ संकेत दिया कि यह मुद्दा केवल राजनीति नहीं, बल्कि लोगों के अस्तित्व और सम्मान से जुड़ा है।
हरीश रावत ने स्पष्ट कहा — “जो जमीन पर बसे हैं, हक भी उन्हीं का है।” उनका यह संदेश सरकार के लिए चेतावनी और जनता के लिए भरोसे का प्रतीक बनकर सामने आया।
हक की इस लड़ाई में संघर्ष जारी रहेगा
जब तक अधिकार नहीं, तब तक आंदोलन थमेगा नहीं।
हक की आवाज़ देहरादून से बुलंद: हरीश रावत का सरकार पर सीधा प्रहार








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