हरिश रावत जी ने देशवासियों को दी गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएँ
भारत का गणतंत्र दिवस हर साल 26 जनवरी को पूरे देश में गर्व, सम्मान और लोकतांत्रिक मूल्यों के उत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह वही ऐतिहासिक दिन है जब 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ और देश एक संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न गणराज्य बना।
इस पावन अवसर पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरिश रावत जी ने देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ दीं और संविधान के मूल्यों को आत्मसात करने का आह्वान किया।
गणतंत्र दिवस की बधाई देते हुए हरिश रावत जी ने कहा कि
“गणतंत्र दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि आत्ममंथन का दिन है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि सत्ता जनता की होती है और उसका उपयोग जनता के हित में होना चाहिए।”
उन्होंने यह भी कहा कि देश को अब भ्रष्टाचार से मुक्ति, अन्याय और असमानता का अंत,और जनता के भरोसे की राजनीति की ओर बढ़ना होगा।
हरिश रावत जी ने विश्वास जताया कि आने वाले समय में जनहित आधारित शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ देश को आगे ले जाया जाएगा।
अपने संदेश में उन्होंने संविधान की आत्मा पर ज़ोर देते हुए कहा कि
“संविधान केवल एक दस्तावेज़ नहीं, बल्कि गरीब, किसान, मज़दूर, महिला और युवा के अधिकारों की ढाल है।”
उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे संविधान की रक्षा करें,
लोकतांत्रिक संस्थाओं को मज़बूत करें,और नफरत के बजाय भाईचारे और एकता को अपनाएँ।
गणतंत्र दिवस हमें यह याद दिलाता है कि भारत कानून के शासन पर चलता है, जहाँ हर नागरिक समान अधिकार रखता है, और सत्ता का स्रोत जनता होती है।
नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर होने वाली भव्य परेड देश की सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक विविधता और राष्ट्रीय एकता
को दर्शाती है।
हरिश रावत जी ने कहा कि इस गणतंत्र दिवस पर हमें यह प्रण लेना चाहिए कि—भ्रष्टाचार के खिलाफ एकजुट होंगे, संविधान और लोकतंत्र की रक्षा करेंगे,और एक ऐसा भारत बनाएँगे जहाँ विकास के साथ न्याय और सम्मान भी हो।
गणतंत्र दिवस हमें यह याद दिलाता है कि भारत की असली ताकत उसकी जनता, उसका संविधान और उसकी लोकतांत्रिक चेतना है।
हरिश रावत जी का संदेश इसी भावना को मज़बूत करता है कि जब जनता जागरूक होगी, तभी हर बुराई का अंत होगा और सच्चा लोकतंत्र स्थापित होगा।
जय हिंद | जय संविधान














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