अंकिता भंडारी हत्याकांड: परिवार की मांग पर बदले वकील, CM बोले- बेटी के नाम पर राजनीति ठीक नहीं
Ankita Bhandari Murder Case |CM Pushkar Singh Dhami | Uttarakhand Governmen : अंकिता भंडारी हत्याकांड में तीनों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है, लेकिन कथित VIP की भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों के कारण यह मामला अब भी चर्चा में है। इस प्रकरण में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली उत्तराखंड सरकार ने घटना के बाद आरोपियों की गिरफ्तारी, विशेष जांच दल (SIT) का गठन, परिवार को आर्थिक सहायता और सरकारी नौकरी देने से लेकर CBI जांच की प्रक्रिया तक कई कदम उठाए हैं।
सरकार का कहना है कि घटना सामने आने के बाद से ही मामले में कानूनी कार्रवाई की गई और दोषियों को सजा दिलाने के लिए प्रभावी पैरवी की गई। वहीं विपक्ष और अन्य आलोचक कथित VIP की भूमिका को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। ऐसे में इस मामले में अब तक हुई कार्रवाई, सरकार के दावों और जारी CBI जांच को समझना महत्वपूर्ण है।
24 घंटे के भीतर गिरफ्तारी, तत्काल गठित हुई SIT
सितंबर 2022 में ऋषिकेश के पास वनंतरा रिजॉर्ट में काम करने वाली अंकिता भंडारी की हत्या का मामला सामने आने के बाद प्रदेश में आक्रोश फैल गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने कार्रवाई शुरू की और घटना सामने आने के 24 घंटे के भीतर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल यानी SIT का गठन किया गया। इसकी अध्यक्षता DIG स्तर की महिला IPS अधिकारी को सौंपी गई। जांच के दौरान आरोपियों से पूछताछ के साथ डिजिटल, तकनीकी, फॉरेंसिक और भौतिक साक्ष्य जुटाए गए। गवाहों के बयान भी दर्ज किए गए।
पुलिस अधिकारियों ने बाद में बताया कि SIT ने 88 दिनों में जांच पूरी कर करीब 500 पन्नों का आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया। आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की गई।
करीब 500 पन्नों की चार्जशीट, लगभग 100 गवाहों के बयान
इस मामले में जांच और अभियोजन की प्रक्रिया को लेकर सरकार की ओर से बताया गया कि आरोपपत्र में महत्वपूर्ण साक्ष्यों को शामिल किया गया था। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक मामले में करीब 100 गवाहों के बयान और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए गए।
जांच के दौरान फॉरेंसिक रिपोर्ट, तकनीकी साक्ष्य और गवाहों के बयानों का परीक्षण किया गया। इसके बाद अभियोजन पक्ष ने न्यायालय में मामले की पैरवी की। सरकार का कहना है कि जांच और अभियोजन की प्रक्रिया में जुटाए गए साक्ष्यों ने दोषियों को सजा दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
30 मई 2025 को कोटद्वार स्थित अपर जिला एवं सत्र न्यायालय ने पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को दोषी ठहराते हुए आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई। तीनों दोषी जेल में बंद हैं।
परिवार की मांग पर तीन बार बदले गए सरकारी वकील
अंकिता भंडारी हत्याकांड की न्यायिक प्रक्रिया के दौरान परिवार ने सरकारी वकीलों को लेकर भी अपनी मांगें रखी थीं। सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार परिजनों की मांग पर तीन बार सरकारी वकील बदले गए।
इस मामले में परिवार की मांगों और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर लगातार चर्चा होती रही। सरकार का पक्ष रहा है कि परिजनों की मांगों पर विचार करते हुए आवश्यक कदम उठाए गए, ताकि मुकदमे की पैरवी प्रभावी ढंग से हो सके।
परिवार को 25 लाख रुपये की सहायता, पिता और भाई को सरकारी नौकरी
अंकिता की हत्या के बाद परिवार को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार ने 25 लाख रुपये की मदद दी। इसके अलावा अंकिता के पिता और भाई को सरकारी नौकरी भी दी गई।
सरकार ने इन कदमों को पीड़ित परिवार को आर्थिक और सामाजिक सहारा देने की पहल के रूप में सामने रखा है। मामले में परिवार की मांगों को लेकर सरकार की ओर से किए गए फैसलों का भी समय-समय पर जिक्र किया जाता रहा है।
माता-पिता की मांग पर CBI जांच की प्रक्रिया
अंकिता भंडारी के माता-पिता ने मामले की CBI जांच की मांग की थी। सरकार की ओर से बताया गया कि परिवार की मांग पर CBI जांच की संस्तुति की गई और केंद्र सरकार की स्वीकृति के बाद जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ी।
पुलिस मुख्यालय में हुई प्रेस वार्ता में भी बताया गया कि इस प्रकरण में CBI जांच जारी है। ऐसे में कथित VIP की भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों पर जांच के निष्कर्ष सामने आने का इंतजार किया जा रहा है।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि कथित VIP की भूमिका को लेकर उठे सवाल और आरोप अपने आप में किसी व्यक्ति की संलिप्तता का प्रमाण नहीं हैं। इस पहलू पर स्थिति जांच के निष्कर्षों और उपलब्ध साक्ष्यों से ही स्पष्ट हो सकेगी।
CM धामी बोले- घटना के पहले दिन से की गई कानूनी कार्रवाई
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर सरकार का पक्ष रखते हुए कहा है कि घटना के पहले दिन से ही हर संभव कानूनी कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि अंकिता के परिवार से मुलाकात के बाद उनकी मांग पर CBI जांच की संस्तुति की गई…जो जारी है।
मुख्यमंत्री ने पुलिस की कार्रवाई और न्यायालय में हुई पैरवी का उल्लेख करते हुए कहा कि तीनों आरोपियों को उम्रकैद की सजा मिली है। उन्होंने कांग्रेस पर इस मामले को बार-बार राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप भी लगाया।
धामी का कहना है कि सरकार का उद्देश्य मामले में कार्रवाई करना और अंकिता को न्याय दिलाना रहा है। वहीं विपक्ष की ओर से कथित VIP की भूमिका को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर राजनीतिक बहस जारी है।
रेखा आर्या ने कहा- CBI जांच के निष्कर्ष का इंतजार करना चाहिए
कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने भी अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर हो रही राजनीतिक बयानबाजी पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि CBI जांच की मांग उठने के बाद जांच की प्रक्रिया शुरू हुई है…इसलिए इसे पूरा होने देना चाहिए और निष्कर्षों का इंतजार करना चाहिए।
उन्होंने न्यायालय और संवैधानिक संस्थाओं पर भरोसा रखने की बात कही। रेखा आर्या ने आरोप लगाया कि इस प्रकरण को लेकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की जा रही है।
ADG ने प्रेस वार्ता में क्या बताया?
अपर पुलिस महानिदेशक (अपराध एवं कानून व्यवस्था) डॉ. वी. मुरुगेशन ने पुलिस मुख्यालय देहरादून में प्रेस वार्ता के दौरान मामले की जांच और न्यायिक कार्रवाई से जुड़ी जानकारी साझा की।
उन्होंने बताया कि घटना सामने आने के 24 घंटे के भीतर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। मुख्यमंत्री के निर्देश पर SIT गठित की गई और जांच के दौरान डिजिटल, तकनीकी, फॉरेंसिक तथा भौतिक साक्ष्य जुटाए गए। गवाहों के बयान और आरोपियों से पूछताछ भी जांच का हिस्सा रहे।
ADG के मुताबिक SIT ने 88 दिनों में जांच पूरी कर करीब 500 पन्नों का आरोपपत्र दाखिल किया। इसके बाद न्यायालय में अभियोजन पक्ष की पैरवी हुई और 30 मई 2025 को तीनों आरोपियों को आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। उन्होंने यह भी बताया कि मामले से जुड़ी CBI जांच जारी है।
दोषियों को सजा के बाद भी क्यों चर्चा में है अंकिता भंडारी मामला?
अंकिता भंडारी हत्याकांड में तीनों दोषियों को सजा मिल चुकी है। सरकार अपनी ओर से की गई कार्रवाई, परिवार को दी गई सहायता और CBI जांच की संस्तुति को प्रमुखता से सामने रख रही है। इसके बावजूद कथित VIP की भूमिका को लेकर उठते सवालों के कारण यह मामला राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा में बना हुआ है।
सरकार समर्थक पक्ष का कहना है कि आरोपियों की गिरफ्तारी से लेकर जांच, चार्जशीट और सजा तक हुई कार्रवाई को भी देखा जाना चाहिए। वहीं आलोचक कथित VIP से जुड़े सवालों पर स्पष्टता की मांग कर रहे हैं।
अब इस प्रकरण में CBI जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे। जांच में सामने आने वाले तथ्यों से ही संबंधित सवालों पर आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल, दोषियों को मिली सजा और जारी जांच, दोनों इस मामले के महत्वपूर्ण पहलू बने हुए हैं।