पूर्व मुख्यमंत्री उत्तराखंड श्री हरीश रावत जी ने अदम्य साहस, स्वाभिमान और स्वराज के अमर प्रतीक छत्रपति शिवाजी महाराज जी की जयंती पर उन्हें भावपूर्ण नमन करते हुए कहा कि शिवाजी महाराज का जीवन केवल इतिहास का गौरव नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए भी प्रेरणा का प्रकाश स्तंभ है।
श्री हरीश रावत जी ने कहा कि शिवाजी महाराज ने विपरीत परिस्थितियों में भी यह सिद्ध कर दिया कि यदि नेतृत्व में दृढ़ इच्छाशक्ति, स्पष्ट दृष्टि और जनसमर्थन हो, तो कोई भी शक्ति जनआकांक्षाओं को दबा नहीं सकती। उनका ‘हिंदवी स्वराज’ केवल शासन परिवर्तन नहीं, बल्कि जनसम्मान, न्याय और आत्मगौरव की स्थापना का संकल्प था।
उन्होंने आगे कहा कि शिवाजी महाराज का प्रशासनिक कौशल, संगठन क्षमता और सामाजिक समरसता का दृष्टिकोण आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने महिलाओं के सम्मान की रक्षा की, धार्मिक सहिष्णुता को बढ़ावा दिया और प्रजा को सर्वोपरि मानते हुए आदर्श सुशासन की नींव रखी।
श्री हरीश रावत जी ने कहा कि आज आवश्यकता है कि हम शिवाजी महाराज के आदर्शों — साहस, स्वाभिमान, राष्ट्रभक्ति और जनसेवा — को अपने जीवन में आत्मसात करें। सत्ता का उद्देश्य सेवा हो, राजनीति का आधार नैतिकता हो और शासन का केंद्र बिंदु जनता का कल्याण हो — यही उनके जीवन का मूल संदेश है।
अंत में श्री हरीश रावत जी ने समस्त देशवासियों से आह्वान किया कि वे शिवाजी महाराज के विचारों से प्रेरणा लेकर एक सशक्त, समरस और स्वाभिमानी भारत के निर्माण में अपना योगदान दें।
छत्रपति शिवाजी महाराज जी को उनकी जयंती पर शत्-शत् नमन।
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