हल्द्वानी में यूजीसी नियमों, आरक्षण और एससी-एसटी एक्ट पर विरोध, उठी इन्हें खत्म करने की मांग
Haldwani News | UGC Rules | Reservation Debate : यूजीसी के नए नियमों, शिक्षा और सरकारी नौकरियों में जाति आधारित आरक्षण तथा एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम को लेकर हल्द्वानी में विरोध और बदलाव की मांग उठाई गई है। इस संबंध में नागरिकों, युवाओं और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच चर्चा की जाएगी। आयोजकों ने इन नियमों और व्यवस्थाओं को वापस लेने या समाप्त करने की मांग रखी है।
प्रकाश हर्बोला ने कहा कि शिक्षा, रोजगार और न्याय व्यवस्था से जुड़े इन विषयों पर संवैधानिक दायरे में चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि युवाओं को समान अवसर देने, आर्थिक और शैक्षणिक रूप से कमजोर लोगों की मदद करने तथा नीति निर्माण में उनकी राय शामिल करने की जरूरत है।
**यूजीसी के नए नियम वापस लेने की मांग**
आयोजकों ने उच्च शिक्षण संस्थानों में लागू यूजीसी के नए नियमों को वापस लेने की मांग की है। उनका कहना है कि विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों की शिकायतों का निष्पक्ष निस्तारण होना चाहिए। संस्थानों की जवाबदेही तय करने और सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर देने पर भी चर्चा की जाएगी।
**जातिगत आरक्षण खत्म करने की मांग**
शिक्षा, सरकारी नौकरियों और पदोन्नति में जाति आधारित आरक्षण समाप्त करने की मांग भी उठाई गई है। इसके विकल्प के रूप में आर्थिक और शैक्षणिक रूप से वंचित लोगों को सहायता, छात्रवृत्ति, बेहतर शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के संसाधन उपलब्ध कराने जैसे सुझाव रखे गए हैं।
**एससी-एसटी एक्ट को समाप्त करने की मांग**
आयोजकों ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम को समाप्त करने की मांग भी की है। इसके साथ ही आपराधिक मामलों में निष्पक्ष जांच, शिकायतकर्ता की सुरक्षा और निर्दोष व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा का विषय उठाया गया है।
लक्ष्मण सिंह लमगड़िया ने कहा कि कानून के तहत वास्तविक पीड़ितों को सुरक्षा और न्याय मिलना चाहिए। साथ ही किसी निर्दोष व्यक्ति के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। उन्होंने सभी वर्गों की बात सुनने और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने पर जोर दिया।
**पूरन सिंह रावत ने यूजीसी नियमों पर उठाए सवाल**
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व उपाध्यक्ष पूरन सिंह रावत ने यूजीसी कानून की धारा 3C पर आपत्ति जताई। उन्होंने इसे संविधान के विरुद्ध बताते हुए नियमों को वापस लेने की मांग की। उनका आरोप है कि राजनीतिक दलों के फैसलों से समाज में जाति और धर्म के आधार पर भेदभाव बढ़ा है।
आयोजकों ने स्पष्ट किया कि इन मुद्दों पर चर्चा का उद्देश्य किसी जाति या समुदाय के प्रति विरोध पैदा करना नहीं….बल्कि कानूनों और नीतियों पर शांतिपूर्ण तथा संवैधानिक तरीके से विचार-विमर्श करना है।
इस विषय पर होने वाली बैठक में सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों, विद्यार्थियों, युवाओं और प्रबुद्ध नागरिकों के विचार आमंत्रित किए गए हैं। बैठक में आगे की रणनीति और आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा पर भी चर्चा की जाएगी।
इस दौरान पूरन सिंह रावत, भगवान चंद्र पंत, सत्येंद्र तोमर, योगेंद्र बिष्ट और भुवन चंद्र भट्ट सहित अन्य लोग शामिल रहे।