उत्तराखंड: NEET UG MBBS केस में खुलती जा रही परतें, फर्जी प्रमाण पत्र के बाद अब लेखपालों का रिकॉर्ड खंगाला जा रहा
NEET UG MBBS Fake Certificate Case | SIT Investigation | Uttarakhand : उत्तराखंड में NEET UG के जरिए MBBS दाखिले से जुड़े फर्जी स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र मामले की जांच अब तेजी से आगे बढ़ रही है। एसआईटी ने मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस की जांच में फर्जी प्रमाण पत्र तैयार कराने से लेकर अभ्यर्थियों को मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलाने तक एक संगठित नेटवर्क के संकेत मिले हैं।
पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों में बिहार निवासी रूपेश पंडित और अरविंद कुमार शामिल हैं। जांच में सामने आया है कि कथित तौर पर अभ्यर्थियों को स्वतंत्रता सेनानी कोटे के जरिए सरकारी मेडिकल सीट दिलाने का सौदा किया जाता था। एक सीट के लिए 45 लाख रुपये तक की रकम तय किए जाने की बात सामने आई है।
तीन छात्राओं के परिजनों से लिए गए 60 लाख रुपये
जांच के अनुसार आरोपी ने उत्तराखंड में तीन छात्राओं को स्वतंत्रता सेनानी कोटे के तहत सरकारी MBBS सीट दिलाने का भरोसा दिया था। पुलिस के मुताबिक तीनों छात्राओं के परिजनों से 20-20 लाख रुपये एडवांस लिए गए थे। इस तरह कुल 60 लाख रुपये एडवांस लेने की बात सामने आई है।
आरोप है कि प्रत्येक सीट के लिए कुल 45 लाख रुपये का सौदा तय किया गया था। बाकी रकम दाखिले की प्रक्रिया पूरी होने के बाद लिए जाने की बात जांच में सामने आई है।
एक ही व्यक्ति के नाम से चार प्रमाण पत्र बनाए जाने की जांच
एसआईटी अब उन फर्जी प्रमाण पत्रों की भी पड़ताल कर रही है…जो कथित तौर पर स्वतंत्रता सेनानी धर्मवीर वर्मा के नाम से तैयार किए गए। दो अलग-अलग मामलों की जांच में अब तक चार अभ्यर्थियों के नाम सामने आने की जानकारी दी गई है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि प्रमाण पत्र तैयार कराने, आवेदन लगाने और दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया में किन-किन लोगों की भूमिका थी।
ऐसे काम करता था कथित नेटवर्क
पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस पूरे मामले में अलग-अलग लोगों की अलग-अलग भूमिका हो सकती है। कथित तौर पर पहले ऐसे अभ्यर्थियों की तलाश की जाती थी….जिन्हें NEET में अपेक्षित अंक नहीं मिले थे या मनचाहे मेडिकल कॉलेज में प्रवेश नहीं मिल पा रहा था।
इसके बाद अभ्यर्थी की जरूरत और श्रेणी के अनुसार दस्तावेज तैयार कराने और दाखिले की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का काम किया जाता था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल थे और रकम किन-किन माध्यमों से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुंची।
मेरठ से चल रही थी कंसल्टेंसी
गिरफ्तार आरोपी रूपेश पंडित बिहार का रहने वाला बताया गया है। पुलिस के अनुसार वह पिछले करीब पांच साल से मेरठ की द्वारिकापुरी कॉलोनी में मिकोडो पाठशाला नाम से कंसल्टेंसी चला रहा था।
जांच में यह भी सामने आया है कि कंसल्टेंसी के जरिए देश के निजी विश्वविद्यालयों के साथ-साथ विदेशों में MBBS समेत अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में दाखिले से संबंधित काम किया जाता था। अब पुलिस यह जांच कर रही है कि इस गतिविधि का फर्जी प्रमाण पत्र मामले से कितना संबंध था।
आरोपियों के मोबाइल भेजे गए फॉरेंसिक जांच के लिए
दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उनके मोबाइल फोन फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे हैं। मोबाइल से मिलने वाली कॉल डिटेल, चैट, दस्तावेज और दूसरे डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर एसआईटी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने की कोशिश कर रही है।
पुलिस यह भी जांच रही है कि आरोपियों के संपर्क में कौन-कौन से अभ्यर्थी, परिजन, बिचौलिए या अन्य लोग थे।
कम अंकों वाले अभ्यर्थियों को सीट मिलने का मामला
जांच में सामने आए मामलों में तीन छात्राओं के MBBS दाखिले रद्द किए जाने की जानकारी है। इनमें एक छात्रा के 301 अंक, दूसरी के 338 अंक और तीसरी के 400 अंक बताए गए हैं। इन अभ्यर्थियों को क्रमशः श्रीनगर, हल्द्वानी और हरिद्वार के मेडिकल कॉलेजों में सीट आवंटित होने की जानकारी सामने आई है।
एक अन्य छात्रा के 234 अंक बताए गए हैं, लेकिन उसके मामले में सीट आवंटित नहीं हुई थी और प्रमाण पत्र फर्जी पाया गया।
यह पूरा मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पुलिस और प्रशासन अब यह जांच कर रहे हैं कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया को किस स्तर तक प्रभावित किया गया।
उत्तराखंड में स्वतंत्रता सेनानी कोटे की 18 MBBS सीटें
जानकारी के अनुसार उत्तराखंड में MBBS दाखिले के लिए स्वतंत्रता सेनानी कोटे के तहत कुल 18 सीटें हैं। इनमें 11 सरकारी और 7 निजी सीटें शामिल हैं।
फर्जी प्रमाण पत्र के मामले सामने आने के बाद अब इन सीटों के लिए इस्तेमाल किए गए दस्तावेजों और उनके सत्यापन की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में है।
दो लेखपाल भी निलंबित
मामले की जांच प्रशासनिक स्तर तक पहुंचने के बाद दो लेखपालों को निलंबित किया गया है। अब राजस्व विभाग से जुड़े दस्तावेजों और प्रमाण पत्रों के सत्यापन की प्रक्रिया की भी जांच की जा रही है।
जांच में यह भी आरोप सामने आया है कि कुछ दस्तावेज तैयार करने के दौरान निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। एक मामले में घर का निरीक्षण किए बिना ही प्रमाण पत्र तैयार किए जाने की बात सामने आई है। दूसरे मामले में भी सत्यापन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठे हैं। इन आरोपों की जांच की जा रही है।
पुराने शिकायत रिकॉर्ड की भी जांच
जांच के घेरे में आए दोनों लेखपालों के खिलाफ पहले की शिकायतों की जानकारी भी जुटाई जा रही है। बताया गया है कि उनके खिलाफ मुख्यमंत्री पोर्टल और जिलाधिकारी कार्यालय में शिकायतें पहले भी पहुंची थीं।
अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि पुरानी शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई और मौजूदा मामले से उनका कोई संबंध है या नहीं।
12 संदिग्ध एसआईटी के रडार पर
एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल ने कहा कि मामले की जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है। एसआईटी की जांच में फिलहाल 12 संदिग्धों के नाम सामने आने की जानकारी दी गई है।
पुलिस का कहना है कि डिजिटल साक्ष्यों, बैंक खातों, दस्तावेजों और आरोपियों के संपर्कों की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। एसआईटी अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी प्रमाण पत्र तैयार कराने और MBBS दाखिले की पूरी प्रक्रिया में कौन-कौन लोग शामिल थे।
कब-कब क्या हुआ?
3 सितंबर को शिकायतकर्ता प्रदीप बहुगुणा ने फर्जी प्रमाण पत्र मामले को लेकर मंत्री और जिलाधिकारी से शिकायत की।
5 सितंबर को चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने अधिकारियों को मामले की जांच के निर्देश दिए।
9 सितंबर को जिलाधिकारी आशीष चौहान ने सीडीओ और एडीएम के नेतृत्व में जांच कमेटी गठित की।
10 सितंबर को एसडीएम सदर ने कुछ छात्रों के नाम पर जारी स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र निरस्त किए।
13 सितंबर को प्रशासन की ओर से रायपुर और क्लेमेंटटाउन थाने में मुकदमे दर्ज कराए गए।
16 सितंबर को स्टेट कोटे से MBBS सीट पाने वाले अभ्यर्थियों के स्थायी प्रमाण पत्रों की जांच की मांग को लेकर शिकायत की गई।
18 सितंबर को एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल ने एसपी देहात जया बलूनी के नेतृत्व में 10 सदस्यीय एसआईटी गठित की।
20 सितंबर को एसआईटी ने हरिद्वार मेडिकल कॉलेज के एक छात्र के मूल दस्तावेज जब्त कर पूछताछ की।
22 सितंबर को एसआईटी ने मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया और पूरे प्रकरण की जानकारी सामने रखी।
फिलहाल एसआईटी की जांच जारी है। आने वाले दिनों में बैंक लेनदेन, मोबाइल डेटा, दस्तावेजों और आरोपियों के संपर्कों से इस मामले में जुड़े अन्य लोगों की भूमिका स्पष्ट होने की उम्मीद है।