उत्तराखंड : कुंभ में पहुंचते ही श्रद्धालुओं को मिलेगा संस्कृत वाला स्वागत, जानिए सरकार की पूरी तैयारी

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Kumbh-Mela

Haridwar Kumbh | Sanskrit Language | Uttarakhand Culture : उत्तराखंड की द्वितीय राजभाषा संस्कृत को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए राज्य सरकार नई पहल करने जा रही है। आगामी कुंभ मेले के दौरान हरिद्वार और ऋषिकेश में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों का स्वागत संस्कृत भाषा के शब्दों और श्लोकों से किया जाएगा। यानी यात्रियों को अब ‘Welcome’ के बजाय ‘स्वागतम्’ जैसे संस्कृत शब्द सुनने को मिलेंगे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के संस्कृत को बढ़ावा देने के प्रयासों के तहत हरिद्वार और ऋषिकेश को संस्कृत नगरी के रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि कुंभ जैसे बड़े धार्मिक आयोजन के जरिए संस्कृत भाषा और उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को देश-दुनिया तक पहुंचाया जा सकता है।

100 से ज्यादा लोगों को दिया जाएगा संस्कृत का प्रशिक्षण

उत्तराखंड संस्कृत संस्थान के सचिव प्रो. विनय कुमार विद्यालंकार ने कहा कि संस्थान जल्द ही 100 से अधिक लोगों को संस्कृत भाषा का प्रशिक्षण देगा। इसमें रेलवे स्टेशन के कुली, ऑटो चालक, टैक्सी चालक, बस कंडक्टर और अन्य आम लोगों को शामिल किया जाएगा।

प्रशिक्षण के दौरान उन्हें यात्रियों से बातचीत में इस्तेमाल होने वाले सामान्य संस्कृत शब्द और वाक्य सिखाए जाएंगे। इसके बाद ये लोग कुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों से संस्कृत के सामान्य शब्दों में संवाद कर सकेंगे।

योजना के तहत अलग-अलग वर्गों के लोगों को हर महीने प्रशिक्षण देने की तैयारी है….ताकि कुंभ के दौरान अधिक से अधिक लोग संस्कृत में यात्रियों का स्वागत कर सकें।

कुंभ के प्रचार में भी संस्कृत का इस्तेमाल

कुंभ मेले के प्रचार-प्रसार में भी संस्कृत भाषा को प्रमुखता देने की योजना बनाई गई है। प्रचार सामग्री और विभिन्न प्रतीक चिन्हों में संस्कृत का इस्तेमाल किया जाएगा। कुंभ से जुड़े कार्यों और कार्यक्रमों के प्रचार में भी संस्कृत भाषा का प्रयोग करने की तैयारी है।

इस पहल के लिए उत्तराखंड संस्कृत संस्थान को बजट की स्वीकृति भी दी गई है।

अपर कुंभ मेला अधिकारी दयानंद सरस्वती ने कहा कि कुंभ में संस्कृत के ज्यादा इस्तेमाल से उत्तराखंड की प्राचीन संस्कृति और भाषा का संदेश देश-विदेश तक पहुंचेगा। रेलवे स्टेशन, बस अड्डों और टैक्सी-ऑटो सेवाओं से जुड़े लोगों के संस्कृत में स्वागत करने से उत्तराखंड की अलग सांस्कृतिक पहचान भी सामने आएगी।

सबसे पहले कुलियों से होगी शुरुआत

इस अभियान की शुरुआत हरिद्वार रेलवे स्टेशन के कुलियों से किए जाने की तैयारी है। कुली संगठन ने भी सरकार की इस पहल का स्वागत किया है।

कुली संगठन के अध्यक्ष किशन सिंह ने कहा कि सरकार की ओर से चलाए जा रहे इस अभियान को सीखा जाएगा। हरिद्वार आने वाले यात्रियों का स्वागत संस्कृत के शब्द ‘स्वागतम्’ से करने की कोशिश की जाएगी।

इस पहल का उद्देश्य सिर्फ कुंभ के दौरान संस्कृत का इस्तेमाल बढ़ाना नहीं….बल्कि उत्तराखंड की प्राचीन भाषा और संस्कृति को आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों तक पहुंचाना भी है।

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