उत्तराखंड की राजनीति में तथ्यों की जगह अफवाहों को हवा देने की कोशिश दुर्भाग्यपूर्ण है। मुस्लिम यूनिवर्सिटी के नाम पर जो भ्रम फैलाया जा रहा है, वह केवल चुनावी मुद्दा गढ़ने का प्रयास है।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इस पूरे प्रकरण पर स्पष्ट शब्दों में कहा कि कांग्रेस ने हमेशा शिक्षा और विकास को प्राथमिकता दी है। वर्ष 2002 में जब कांग्रेस की सरकार बनी, तब शैक्षिक संस्थानों के लिए भूमि लीज पर देना एक नीति के तहत किया गया निर्णय था। वह प्रक्रिया पारदर्शी थी और प्रदेश के शैक्षणिक ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से थी।
उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि आज वही लोग प्रश्न उठा रहे हैं, जो खुद बड़े उद्योगपतियों को ज़मीन देने पर चुप्पी साध लेते हैं। डाकपत्थर और जॉर्ज एवरेस्ट जैसी संपत्तियों के मामले में जो निर्णय लिए गए, उनकी पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
हरीश रावत ने प्रीतम सिंह के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा—“थैंक्यू प्रीतम — आपको राजनीति छोड़ने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि भाजपा से झूठ की राजनीति छुड़वानी है। उत्तराखंड को आज आपकी ज़रूरत है और हम सबको मिलकर भाजपा के पाखंड से प्रदेश को मुक्ति दिलानी है। आप यह करके दिखाने में सक्षम हैं।”
उन्होंने कहा कि प्रदेश के सामने असली मुद्दे सुरक्षा, बेरोजगारी और विकास के हैं। देहरादून और ऋषिकेश की हालिया घटनाएं कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं। ऐसे समय में समाज को धर्म के आधार पर बांटने की राजनीति दुर्भाग्यपूर्ण है।
हरीश रावत ने स्पष्ट किया कि अपराधी का कोई धर्म नहीं होता और यदि किसी भी जमीन का दुरुपयोग हुआ है तो उसकी जांच और कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन पूरे समाज को कटघरे में खड़ा करना या बिना प्रमाण के आरोप लगाना लोकतंत्र के लिए घातक है।
उन्होंने आह्वान किया कि उत्तराखंड की जनता को भ्रमित करने की बजाय विकास और पारदर्शिता की राजनीति होनी चाहिए।
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