न्याय की मांग पर एकजुट हुआ उत्तराखंड, VIP की पहचान पर सस्पेंस बरकरार
अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग को लेकर देहरादून के परेड ग्राउंड के बाहर आयोजित महापंचायत में जनसैलाब उमड़ पड़ा। “अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच” की अगुवाई में हुई इस महापंचायत में कांग्रेस समेत इंडिया गठबंधन के दल, राज्य आंदोलनकारी, पूर्व सैनिक, सामाजिक संगठन और विभिन्न जन सरोकारों से जुड़े प्रतिनिधि बड़ी संख्या में शामिल हुए।
महापंचायत में पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बेटी अंकिता के माता-पिता से भेंट कर अपनी एकजुटता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अपार दुःख के बावजूद माता-पिता का संयम और साहस पूरे उत्तराखंड के लिए प्रेरणा है।
अपने संबोधन में हरीश रावत ने साफ कहा कि यह लड़ाई किसी एक दल की नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड की सामूहिक चेतना की लड़ाई है। उन्होंने कहा,
“जब न्याय की लड़ाई होती है, तब उसमें सब बराबर के भागीदार होते हैं। राजनीतिक दल भी, सामाजिक संगठन भी, आंदोलनकारी भी — हम सब साथ हैं।”
उन्होंने सामाजिक संगठनों की भूमिका को “प्रेरक शक्ति” बताते हुए कहा कि राजनीतिक दल को उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने में कोई संकोच नहीं है — “जरूरत पड़ी तो हम पीछे चलने को भी तैयार हैं।”
हरीश रावत ने अंकिता द्वारा अपने मित्र को भेजे गए संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि “VIP” का जिक्र कोई सामान्य बात नहीं है। उनके अनुसार, उस बयान को “डाइंग डिक्लेरेशन” का दर्जा दिया जाना चाहिए था।
उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर FIR दर्ज करने में देरी क्यों हुई? पोस्टमार्टम और साक्ष्य जुटाने में लापरवाही क्यों बरती गई? मोबाइल डेटा और CCTV जैसे अहम सबूतों की स्थिति आज तक स्पष्ट क्यों नहीं की गई?
उन्होंने कहा, “चाहे वह कितना ही बड़ा व्यक्ति क्यों न हो, चाहे उसे बचाने के लिए कितनी ही ताकत क्यों न लग जाए — उसे कानून के शिकंजे में आना ही होगा।”
पूर्व मुख्यमंत्री ने चिंता जताई कि कहीं न्याय की प्रक्रिया केवल औपचारिकता बनकर न रह जाए। उन्होंने मांग की कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी हो तथा साक्ष्य नष्ट करने वालों और मामले में टालमटोल करने वाले अधिकारियों की भी जवाबदेही तय हो। उनका कहना था कि यह सिर्फ एक अपराध का मामला नहीं, बल्कि उत्तराखंड की अस्मिता और आत्मगौरव का प्रश्न है।
हरीश रावत ने अंकिता की तुलना तीलू रौतेली और जिया रानी जैसी ऐतिहासिक वीरांगनाओं से करते हुए कहा कि उसने अन्याय के आगे झुकने से इनकार किया और अपनी अस्मिता की रक्षा के लिए खड़ी रही। उन्होंने महापंचायत को “निर्णायक संकल्प” बताते हुए कहा कि अब यह लड़ाई अंतिम मोड़ तक ले जाई जाएगी।
महापंचायत में कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के दलों के अलावा राज्य आंदोलनकारी, पूर्व सैनिक संगठन, महिला समूह और अनेक सामाजिक मंचों की भागीदारी ने इस मुद्दे को व्यापक जनसमर्थन का रूप दिया।
सभा के अंत में हरीश रावत ने सभी उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उत्तराखंड की सामूहिक भावना को अब कोई दबा नहीं सकता।
जय हिंद, जय भारत, जय उत्तराखंड, जय महिला।















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