हरीश रावत ने स्व. बलबीर सिंह नेगी को याद कर कहा—‘उनकी रिक्तता हमेशा खलेगी
उत्तराखंड की राजनीति में एक सादगीपूर्ण, कर्मठ और जनविश्वास से जुड़े नेता के रूप में पहचाने जाने वाले बलबीर सिंह नेगी के निधन पर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने गहरा शोक व्यक्त किया।
देहरादून स्थित उनके आवास पर पहुँचकर हरीश रावत ने स्व. नेगी जी के चित्र पर श्रद्धासुमन अर्पित किए और परिजनों से भेंट कर अपनी भावभीनी संवेदनाएँ व्यक्त कीं।
हरीश रावत ने कहा कि बलबीर सिंह नेगी जी का निधन कांग्रेस पार्टी के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उन्होंने टिहरी जनपद, विशेषकर घनसाली विधानसभा क्षेत्र के दूरस्थ पर्वतीय गाँवों में जनता के बीच जो विश्वास अर्जित किया, वह उन्हें एक वास्तविक जननेता बनाता है। पार्टी संगठन से लेकर चुनावी रणनीति तक, कांग्रेस ने हमेशा उनके अनुभव, नेतृत्व और मार्गदर्शन को अहम माना।
बलबीर सिंह नेगी जी सिर्फ़ राजनीति तक सीमित नहीं थे। खेती, बागवानी और सामाजिक सरोकारों में उनकी गहरी रुचि थी। हरीश रावत ने भावुक स्मृतियाँ साझा करते हुए बताया कि ‘कीवी मिशन उत्तराखंड’ की प्रेरणा भी नेगी जी के बागवानी कार्य से ही मिली। अलग-अलग पर्वतीय अंचलों में कीवी बागवानी को बढ़ावा देने में नेगी जी और भगवान सिंह कोरंगा जैसे लोगों की अग्रणी भूमिका रही।
हरीश रावत ने यह भी कहा कि नेगी जी हर वर्ष अपने बगीचे की कीवी उन्हें भेजते थे—यह उनका स्नेह और अपनत्व था, जिसे वे हमेशा याद रखेंगे।
77 वर्ष की आयु में लंबी बीमारी के बाद देहरादून के कैलाश अस्पताल में स्व. बलबीर सिंह नेगी का निधन हुआ। उनके जाने से न केवल घनसाली क्षेत्र, बल्कि पूरे उत्तराखंड के राजनीतिक और सामाजिक जीवन में शोक की लहर है।
उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत उत्तर प्रदेश काल में की, 1988 में जनता दल से विधायक बने, 2002 में एनसीपी और 2007 में कांग्रेस के टिकट पर घनसाली से विधायक चुने गए। सड़क, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं के लिए उनकी आवाज़ हमेशा मुखर रही।
हरीश रावत ने ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्मा को शांति मिले और परिजनों व चाहने वालों को इस असहनीय दुःख को सहने की शक्ति प्राप्त हो।
ॐ शांति, शांति।
यह श्रद्धांजलि सिर्फ़ एक नेता को नहीं, बल्कि उत्तराखंड की जनभावना से जुड़े एक युग को समर्पित है।















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