🚩 बोलो सनातन धर्म की जय 🚩
शंकराचार्य कोई व्यक्ति नहीं, सनातन की परंपरा और संस्था हैं।
इन्हीं शब्दों के साथ पूर्व मुख्यमंत्री Harish Rawat ने देश को याद दिलाया कि सनातन धर्म सत्ता का विषय नहीं, आस्था और मर्यादा की परंपरा है।
आज हालात ऐसे बना दिए गए हैं कि यह तय किया जाने लगा है—कौन शंकराचार्य वैध है और कौन नहीं।
जबकि सारा ज्योतिष पीठ क्षेत्र, सनातन समाज और श्रद्धालु वर्षों से जिन्हें शंकराचार्य मानते आए हैं, उनके चरणों में श्रद्धा रखते हैं।
शंकराचार्य संस्था का अवमूल्यन किसी भी सत्ता को करने का अधिकार नहीं है।
सनातन की सबसे महत्वपूर्ण परंपरा को राजनीतिक प्रमाणपत्र की ज़रूरत नहीं होती।
इसी पीड़ा और विरोध को व्यक्त करने के लिए हरीश रावत ने अपने आवास पर एक घंटे का मौन उपवास रखा।
यह उपवास किसी दल के खिलाफ नारेबाज़ी नहीं था,
बल्कि सनातन की गरिमा के लिए एक शांत लेकिन सशक्त प्रतिरोध था।
जो लोग धर्म की बात करते हैं,
आज वही धर्मगुरुओं की मर्यादा को ठेस पहुँचा रहे हैं।
और ऐसे समय में हरीश रावत का मौन यह सवाल छोड़ जाता है—
क्या सनातन सिर्फ़ भाषणों के लिए है, या सम्मान के लिए भी?















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